Friday, June 25, 2010

शीला तूने कर दिया कमाल


स्कूली छात्रा को सोने का पदक






कोहरे से ढंके शेरघाटी से एक खुशखबरी आई है.बाराचट्टी की एक लडकी ने सिंगापुर में धमाल कर दिया.उसके तेज़ तर्रार कराटे के करतब का कमाल यह हुआ कि उसकी झोली में सोने का पदक आ गिरा !! इन दिनों जहां इस अंचल में खून-खराबा ,माओं के नाम पर हिंसा का विद्रूप सही गलत पुलिस की धर-पकड़ से व्यथित लोगों के संत्रास विलाप !!.......के बीच ऐसी खुशियाँ ,हम सब से पहले इस बालिका को सलाम करते हैं..और अनगिनत मुबारकबाद देते हैं.
गर्व से कहो हम बिहारी हैं का नारा बुलंद करने वाले अपने नितीश जी क्यों पीछे रहते .जिले की दूसरी अन्य प्रतिभावान छात्राओं के साथ शीला का भी सम्मान कर ,लोगों को गर्वोक्ति से सराबोर कर दिया!
विश्वास यात्रा के दौरान शुक्रवार को गया पहुंचे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने गांधी मैदान में
आयोजित आमसभा के दौरान हाल ही में सिंगापुर में संपन्न राष्ट्रीय स्तर के कराटे प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक हासिल कर लौटी बाराचट्टी प्रखंड के कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय की छात्रा शीला कुमारी को पुरस्कृत कर सम्मानित किया.

चित्र साभार जागरण

Friday, March 12, 2010

कमाल एक किसान का



खेतों में पानी पटाने का अचुक हुआ धमाल

कौन कहता है आसमान में सुराख नहीं हो सकता
एक पत्थर तो तबियत से उछालो यारो !

दुष्यंत कुमार के इस शेर को अपनी मेहनत और बुद्धि के बल पर चरितार्थ किया है शेरघाटी से बीस किलो मीटर पर स्थित बारा चट्टी के एक किसान ने.
सिंचाई की नितांत नयी तकनीक के बूते बाराचट्टी प्रखंड के कलुआ खुर्द गांव के किसान रामेश्वर प्रसाद ने अपने खेतों से ढेरों आलू की उपज पैदा की है.मगध के घोर अभावों वाले इस इलाके में उनकी अक़ल्मंदी की खूब प्रशंसा की जा रही है.लोग उन से इसे सीखने के लिए दूर-दूर से आ रहे हैं.इसी क्रम में बिहार के ही लक्खीसराय से एक प्रतिनिधिमंडल उनके पास आया।
रामेश्वर प्रसाद के इस कमाल को देखने सोमवार को लक्खीसराय जिले के 7 प्रखडों के 40 किसान पहुंचे । कृषि प्रौद्योगिकी प्रबंध अभिकरण 'आत्मा' लक्खीसराय के द्वारा 'आत्मा' गया के सफल कृषकों के प्रक्षेत्रों पर परिभ्रमण कार्यक्रम के तहत उक्त गांव के किसानों को यहां लाया गया। बाहर से आये किसान ब्रजकिशोर प्रसाद खेती की व्यवस्था देख काफी प्रफ्फुलित हुए। वे कहते हैं कि इन्होंने जो पटवन की व्यवस्था जमीन के अंदर प्लास्टिक का पाइप बिछा कर किया है। वह सचमुच एक नई सोच है। श्री सिंह कहते हैं कि इस पटवन की व्यवस्था से 85 प्रतिशत पानी सीधे खेतों में पहुंच जाती है। जिससे पानी की बर्बादी तथा खेतों में फसल को आवश्यकता से अधिक पानी मिली है। पटवन की इसी तरह की व्यवस्था श्री सिंह अपने गांव साबीकपुर जाकर तुरंत करने की बात कही। प्रखंड रमीयक ग्राम परसावां के किसान वरुण कुमार कहते हैं कि रामेश्वर जी छह बीघे की खेती से अपना हर सुख सुविधा पा हे हैं। जिसकी वजह है कि इनके खेतों के सभी क्यारियों में फसल को समुचित पानी मिल जा रहा है। वे बतलाते हैं कि हमलोग 60 बीघा खेत रखकर उतना पैसा नहीं कमा पाते हैं। कुमार तो इनकी व्यवस्था देख इतना प्रभावित थे कि वह अपने अन्य लोगों को इस कार्य की जानकारी दूरभाष के द्वारा गांव वालों को दे रहे थे। प्रखंड सूर्यगढ़ा ग्राम कटिहार के संजय कुमार यादव ने बताया कि इनके व्यवस्था को हर किसाना को उतारने की जरूरत है। इस तरह के कार्य से ऊंचे खेतों को भी पानी मिलेगा तथा हर खेत सिंचित होंगे। किसान रामेश्वर के आलू की पैदावार देख सभी भौंचक रह गये। सभी किसानों ने उनसे आलू की खेती की जानकारी विस्तार से लिया।


समाचार स्रोत जागरण

Monday, February 22, 2010

क्या चाहते हैं नक्सली

फ़लसफ़ा गांधी का मौजूं है कि नक्सलवाद है!!! बिलकुल इसी तर्ज़ पर आज नक्सलियों ने चलना शुरू कर दिया है..बिहार का मध्य इलाक़ा यूँ इसी बहाने हमेशा से सुर्ख़ियों में रहता आया है, जहां गौतम ने कभी शांती का सन्देश फैलाया था.मखदूम बिहारी ने अमन का पैग़ाम दिया था..आज हिंसा की चपेट में धू-धू कर रहा है.क्या माओ ने कभी विकास और शिक्षा का विरोध किया था.जवाब यक़ीनन नहीं में होगा.फिर आज नक्सली ऐसा क्यों कर रहे हैं।
शेरघाटी से मिली खबर अखबार की कतरनों से..एक फिल्म भी है देख सकते हैं.




Sunday, February 21, 2010

होली के रंग में रंगा किसी ने जब शहरोज़ को



Thursday, February 18, 2010

आज़ादी के योद्ध्या ..की दुखद -कथा

शेरघाटी से ही सम्बंधित बिस्मिल अजीमाबादी की पंक्ति सरफरोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है....के जोश में ही जगलाल महतो आये थे.आज़ादी मिलने के बाद हुए प्रथम चुनाव में आप शेरघाटी के पहले विधायक चुने गए.लेकिन प्रतिबद्धता के साथ ज़िन्दगी जीने वालों को हमारा समाज और देश क्या दे पाता है..ये ख़ास रपट बानगी पेश करती है.कभी अखबार के लिए लिखी गयी राकेश कुमार पाठक रौशन की इस दुखांत-कथा को हम साभार पुन: प्रस्तुत कर रहे हैं..क्या दशा अब भी बदली है....जवाब होगा कतई नहीं!



Tuesday, February 16, 2010

ख़बरों में जिला बनाओ आन्दोलन

हमें भी ज़िद है कि आशियाँ बनायेंगे!! कहीं सूबा बनाओ तो कहीं जिला बनाओ! गर विकास का समान वितरण हो तो मुझे लगता है कि ऐसी आवाज़ कहीं से न उठे.ले मशालें चल पड़े हैं लोग मेरे गाँव के!! अपुन के शेरघाटी से खबर यही है..बहुत दिनों से भाई इमरान की शिकायत थी कि उन्हों ने ढेरों चीज़ें यानी अखब़ार की कतरनें भेज रखी हैं और मैं उन्हें पोस्ट नहीं कर रहा हूँ.दरअसल जिला बनाओ उनकी ही ज़िद है जिसे हज़ारों ने स्वर दिया है..परिदृश्य फ़िलहाल क्या है देखिये ..अखबारों के बहाने..शहरोज़













Tuesday, January 26, 2010

जानकी जी को मिला पद्मश्री



निराला के दौर के शेष रह गए दुर्लभ मसिजीवियों में से एक आचार्य जानकी जो को देर से ही सही पद्मश्री सम्मान मिलने की खबर से शेरघाटी में ख़ुशी की लहर व्याप्त है.वहीँ कुछ लोगों को नाराजगी इस बायस है की आप को पद्मभूषण से नवाज़ा जाना चाहिए था.
शेरघाटी से कुछ ही दूरी पर है मैगरा जहां आचार्य-कवि जानकी वल्लभ शास्त्री का बचपन का दिन बीता.यहीं की गलियों में आपने उछल-कूद मचाई .कविताई भी संभवता यहाँ के पहाड़ों और नदियों ने करना आरम्भ करवा दिया था.कई पुस्तकों के रचयिता जानकी जी के मानास से विभिन विधाओं में कई पुस्तकों का सृजन हुआ है.

आपको राजेन्द्र शिखर, भारत भारती और शिवपूजन सहाय जैसे कई पुरस्कारों से पहले ही समादृत किया जा चुका है।

सन १९९४ में भी आपको पद्मश्री देने की सरकारी-घोषणा हुई थी, लेकिन आपने तब लेने से इनकार कर दिया था.इस बार भी अनमने मन से उन्हों ने इसे स्वीकार किया है तथा इसमें उनके परिवार और शुभचिंतकों की महती भूमिका से इनकार नहीं किया जा सकता.श्री जानकी जी का कहना है कि अब इस उम्र में उनके लिए ऐसा सम्मान अपमान की तरह है, हमसे अच्छा किसी नए लोगों को दिया जाता , जैसा अब तक सरकार मुझसे कई कम वयस्कों को ये सम्मान पहले ही दे चुकी है.उनहोंने आगे कहा कि रामवृक्ष बेनीपुरी या दिनकर को ऐसे सरकारी सम्मान से पहले ही जनता उन्हें अपने प्रेम से समादृत कर चुकी थी.और जनता ने ही दिनकर को राष्ट्र-कवि का खिताब दिया।

जानकी जी ने कहा कि उनका सम्मान भी उनके पाठक और प्रशंसक हैं.जो बहुत हैं।

काफी दिनों से जानकी जी मुजफ्फरपुर में रह रहे हैं।

Sunday, January 24, 2010

ठेला चलाने वाले का लड़का स्टेशन मास्टर बना!!


कौन कहता है आसमान में सुराख़ नहीं हो सकता
एक पत्थर तो तबियत से उछालो यारो!

और मुंगेश्वर भुईयां तथा उसके बेटे विजय मांझी ने दुष्यंत की इन पंक्तियों को आखिर चरितार्थ कर दिखाया.शेरघाटी से महज़ १० किलो मीटर के फासले पर है बांकेबाजार, यहीं के गाँव टंडवा के हैं कथित महादलित जाति के मुंगेश्वर भुईयां.न एक धुर जमीन और रहने के लिए मात्र फुस की झोपड़ी.रोज़ी-रोटी के लिए ठेला चलाते हैं.कहा जाता है कि कठिन परिश्रम एवं पक्का इरादा निसंदेह कायाबी की निशानी है.ये साकार हुआ,उन्होंने ठेला चलाकर परिवार का परवरिश करते हुए बच्चों को पढ़ाया।

एक अखबारनवीस से बतियाते हुए मुंगेश्वर भुईयां कहते हैं कि 15 वर्ष की उम्र में उनकी शादी हो गयी और उन्हें परिवार से अलग कर दिया गया था। अलग होने के बाद परिवार का बोझ बढ़ा। खेती तो थी नहीं, रहने के लिए प्रखंड मुख्यालय के सामने झोपड़ी। सवा सेर कच्ची चावल पर रोरोडीह के एक किसान के घर बंधुआ मजदूरी किया करता था। बाल बच्चे हुए तो सवा सेर चावल से परिवार का भूख नहीं मिटने की स्थिति में बंधुआगिरी छोड़कर तीन रुपये जमा पर 1989-90 से ठेला चलाना शुरू किया तथा बच्चों में एक बेटी की शादी किया। अपनी बुरी स्थिति में भी मुंगेश्वर ने पक्का इरादा बनाया कि बेटा को जरूर पढ़ाएंगे । ये बताते हैं कि ठेला चलाते हुए बेटी के बाद बेटा विजय मांझी को नेकीपन स्कूल में फिर गया कालेज में नामाकरण कराया। बेटे ने भी इनके सपने को सच करने के लिए खूब मेहनत की. आज वह मास्टर बनकर नवीनगर में अपनी जिम्मेदारी संभाल रहा है।

मुंगेश्वर मांझी को आज भी अपने बेटे को मिलने वाला पगार की जानकारी नहीं है। लेकिन इतना जरूर जानता है कि दस हजार से उपर वेतन मिलता होगा।

Saturday, January 16, 2010

भूख से हुई मौत ....

शेरघाटी से महज़ १२ किलो मीटर की दूरी पर स्थित डोभी में हुई भूख से मौत का भूत सरकारी अमले की नींद में खलल डाल रहा है.तमाम दावे -प्रतिदावे के बावजूद हालत जस की तस है!आज भी प्रत्येक अंत्योदय योजना वाले परिवार को 35 किलो प्रत्येक माह अनाज देने की अनदेखी कर 25 किलो का कूपन मिल रहा है.महादलित बस्तियों की स्थिति अच्छी नहीं है। एक व्यक्ति को सिर्फ चलने के लिए 1200 कैलोरी की जरूरत है। जो यहां नहीं मिल रहा है।

सरकार कर्तव्य का पालन करने में असफल

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर विशेष आयुक्तहर्ष मंदर गत दिनों सुबह डोभी प्रखंड के बनवारा गांव पहुंचे . जहां अक्टूबर 2006 में एक परिवार के तीन सदस्यों की मौत भूख से हो गयी थी. जांच टीम के साथ सरकारी अधिकारी भी मौजूद थे। विशेष आयुक्त हर्ष मंदर के द्वारा मृतक के परिजनों से परिवार के तीन सदस्यों की मौत का पूरा जायजा लिया। परिजनों के द्वारा जांच टीम सदस्य के सामने अनाज की विकट समस्या, गरीबी, बेरोजगारी बताते हुए अनाज के अभाव में तड़प-तपड़पकर भूख से मौत होने की बात कही। नरेगा के तिहत भी ग्रामीणों को काम नहीं मिल रहा है ।



मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सरकार ने विकास के जो भी दावे किये जा रहे हों। लेकिन सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त विशेष आयुक्त हर्ष मंदर व्यवस्था से खुश नहीं थे। उन्होंने साफ शब्दों में यह माना कि इस महादलित टोलों में जो उन्होंने देखा उससे यह कहा जायेगा कि- गया में भूख के साथ लोग जी रहे हैं।

विशेष आयुक्त चकित थे कि इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना के बाद सरकार की जो योजनाएं हैं वह उन तक क्यों नहीं पहुंच रही है । उन्होने एक प्रश्न के जवाब में कहा कि पिछले दिनों जो मौत की घटनाएं हुई है। उनके लिए जिम्मेवार व्यक्ति पर कार्रवाई होगी। यहाँ की स्थिति पर अपनी रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट को सौंपेंगे।

जिलाधिकारी से गया की विकास योजनाओं की स्थिति पर अपनी राय रखते हुए विशेष आयुक्त ने बताया कि वे छह स्थानों पर जिलाधिकारी का पद संभाल चुके हैं। वे भलीभांति उस पद की जिम्मेदारी को जानते हैं। उनकी अपनी कुछ मजबूरी हो सकती है। मूल रूप से वे खुलकर तो नहीं। लेकिन इतना बताया कि जिले में नरेगा, आंगनबाड़ी केन्द्र और जनवितरण प्रणाली की व्यवस्था अच्छी नहीं है। उन्होंने कहा कि अब गांव तक पहुंचने वाले कार्यक्रम योजना नहीं लोगों के अधिकार हैं। सरकार आज भी कर्तव्य का पालन करने में सफल नहीं है। विशेष आयुक्त के साथ चल रहे रूपेश जी राज्य खाद्य प्रबंधन से जुड़े हैं। ये निकट भविष्य में गया आकर जनवितरण प्रणाली की व्यवस्था पर कार्य करेंगे। दो दिवसीय दौरे के बाद विशेष आयुक्त पुन: दिल्ली लौट गये।