Monday, February 22, 2010

क्या चाहते हैं नक्सली

फ़लसफ़ा गांधी का मौजूं है कि नक्सलवाद है!!! बिलकुल इसी तर्ज़ पर आज नक्सलियों ने चलना शुरू कर दिया है..बिहार का मध्य इलाक़ा यूँ इसी बहाने हमेशा से सुर्ख़ियों में रहता आया है, जहां गौतम ने कभी शांती का सन्देश फैलाया था.मखदूम बिहारी ने अमन का पैग़ाम दिया था..आज हिंसा की चपेट में धू-धू कर रहा है.क्या माओ ने कभी विकास और शिक्षा का विरोध किया था.जवाब यक़ीनन नहीं में होगा.फिर आज नक्सली ऐसा क्यों कर रहे हैं।
शेरघाटी से मिली खबर अखबार की कतरनों से..एक फिल्म भी है देख सकते हैं.




2 comments:

T.M.Zeyaul Haque said...

abhi hamzabaan par jo padha vo to isse bhi zyada aankh kholnewala hai.khuda jane ye kya chahte hain.

नारायण प्रसाद said...

"उगरवाद से घिरल बिहार में विकास के दरकार" नामक शीर्षक वला 20 सितम्बर 2004 के जे अखबार के कतरन के अपने पोस्ट कइलथिन हँ, ऊ कउन अखबार के हइ ? कहीं दैनिक हिन्दुस्तान, पटना के तो नयँ ?

राकेश कुमार रौशन जी के अगर कुछ अता-पता (इ-मेल) अपने के मालूम हइ तऽ सूचित करथिन । धन्यवाद ।