Friday, March 12, 2010

कमाल एक किसान का



खेतों में पानी पटाने का अचुक हुआ धमाल

कौन कहता है आसमान में सुराख नहीं हो सकता
एक पत्थर तो तबियत से उछालो यारो !

दुष्यंत कुमार के इस शेर को अपनी मेहनत और बुद्धि के बल पर चरितार्थ किया है शेरघाटी से बीस किलो मीटर पर स्थित बारा चट्टी के एक किसान ने.
सिंचाई की नितांत नयी तकनीक के बूते बाराचट्टी प्रखंड के कलुआ खुर्द गांव के किसान रामेश्वर प्रसाद ने अपने खेतों से ढेरों आलू की उपज पैदा की है.मगध के घोर अभावों वाले इस इलाके में उनकी अक़ल्मंदी की खूब प्रशंसा की जा रही है.लोग उन से इसे सीखने के लिए दूर-दूर से आ रहे हैं.इसी क्रम में बिहार के ही लक्खीसराय से एक प्रतिनिधिमंडल उनके पास आया।
रामेश्वर प्रसाद के इस कमाल को देखने सोमवार को लक्खीसराय जिले के 7 प्रखडों के 40 किसान पहुंचे । कृषि प्रौद्योगिकी प्रबंध अभिकरण 'आत्मा' लक्खीसराय के द्वारा 'आत्मा' गया के सफल कृषकों के प्रक्षेत्रों पर परिभ्रमण कार्यक्रम के तहत उक्त गांव के किसानों को यहां लाया गया। बाहर से आये किसान ब्रजकिशोर प्रसाद खेती की व्यवस्था देख काफी प्रफ्फुलित हुए। वे कहते हैं कि इन्होंने जो पटवन की व्यवस्था जमीन के अंदर प्लास्टिक का पाइप बिछा कर किया है। वह सचमुच एक नई सोच है। श्री सिंह कहते हैं कि इस पटवन की व्यवस्था से 85 प्रतिशत पानी सीधे खेतों में पहुंच जाती है। जिससे पानी की बर्बादी तथा खेतों में फसल को आवश्यकता से अधिक पानी मिली है। पटवन की इसी तरह की व्यवस्था श्री सिंह अपने गांव साबीकपुर जाकर तुरंत करने की बात कही। प्रखंड रमीयक ग्राम परसावां के किसान वरुण कुमार कहते हैं कि रामेश्वर जी छह बीघे की खेती से अपना हर सुख सुविधा पा हे हैं। जिसकी वजह है कि इनके खेतों के सभी क्यारियों में फसल को समुचित पानी मिल जा रहा है। वे बतलाते हैं कि हमलोग 60 बीघा खेत रखकर उतना पैसा नहीं कमा पाते हैं। कुमार तो इनकी व्यवस्था देख इतना प्रभावित थे कि वह अपने अन्य लोगों को इस कार्य की जानकारी दूरभाष के द्वारा गांव वालों को दे रहे थे। प्रखंड सूर्यगढ़ा ग्राम कटिहार के संजय कुमार यादव ने बताया कि इनके व्यवस्था को हर किसाना को उतारने की जरूरत है। इस तरह के कार्य से ऊंचे खेतों को भी पानी मिलेगा तथा हर खेत सिंचित होंगे। किसान रामेश्वर के आलू की पैदावार देख सभी भौंचक रह गये। सभी किसानों ने उनसे आलू की खेती की जानकारी विस्तार से लिया।


समाचार स्रोत जागरण

6 comments:

Amitraghat said...

very good....
amitraghat.blogspot.com

ललित शर्मा said...

शहरोज भाई,
अब सही हो गया है।
टेम्पलेट बदलने।
आभार

शहरोज़ said...

आप बेहतर लिख रहे/रहीं हैं .आपकी हर पोस्ट यह निशानदेही करती है कि आप एक जागरूक और प्रतिबद्ध रचनाकार हैं जिसे रोज़ रोज़ क्षरित होती इंसानियत उद्वेलित कर देती है.वरना ब्लॉग-जगत में आज हर कहीं फ़ासीवाद परवरिश पाता दिखाई देता है.
हम साथी दिनों से ऐसे अग्रीग्रटर की तलाश में थे.जहां सिर्फ हमख्याल और हमज़बाँ लोग शामिल हों.तो आज यह मंच बन गया.इसका पता है http://hamzabaan.feedcluster.com/

shabd nirantar said...

main bhi sherghati se parichit hoon.mera nanihal hai wahan.nagnupa gaon mein mere mama dr,ramjatan singh hindi ke professor rahe hain aaj kal gaon mein hi rah rahe hain.mere bade mama ji ko aap jante honge jamuna babu mukhiya ji ,ab we nahi rahe .khub likhiye

अरुणेश मिश्र said...

nice .

नारायण प्रसाद said...

समचार स्रोत जागरण का उल्लेख आपने तो किया, लेकिन प्रकाशन विवरण भी देना चाहिए था । जैसे - जागरण का कहाँ का संस्करण है, तारीख और पृष्ठ संख्या । यदि कोई लिंक उपलब्ध हो तो उसे भी देना चाहिए ।