
खेतों में पानी पटाने का अचुक हुआ धमाल
कौन कहता है आसमान में सुराख नहीं हो सकता
एक पत्थर तो तबियत से उछालो यारो !
दुष्यंत कुमार के इस शेर को अपनी मेहनत और बुद्धि के बल पर चरितार्थ किया है शेरघाटी से बीस किलो मीटर पर स्थित बारा चट्टी के एक किसान ने.
सिंचाई की नितांत नयी तकनीक के बूते बाराचट्टी प्रखंड के कलुआ खुर्द गांव के किसान रामेश्वर प्रसाद ने अपने खेतों से ढेरों आलू की उपज पैदा की है.मगध के घोर अभावों वाले इस इलाके में उनकी अक़ल्मंदी की खूब प्रशंसा की जा रही है.लोग उन से इसे सीखने के लिए दूर-दूर से आ रहे हैं.इसी क्रम में बिहार के ही लक्खीसराय से एक प्रतिनिधिमंडल उनके पास आया।
रामेश्वर प्रसाद के इस कमाल को देखने सोमवार को लक्खीसराय जिले के 7 प्रखडों के 40 किसान पहुंचे । कृषि प्रौद्योगिकी प्रबंध अभिकरण 'आत्मा' लक्खीसराय के द्वारा 'आत्मा' गया के सफल कृषकों के प्रक्षेत्रों पर परिभ्रमण कार्यक्रम के तहत उक्त गांव के किसानों को यहां लाया गया। बाहर से आये किसान ब्रजकिशोर प्रसाद खेती की व्यवस्था देख काफी प्रफ्फुलित हुए। वे कहते हैं कि इन्होंने जो पटवन की व्यवस्था जमीन के अंदर प्लास्टिक का पाइप बिछा कर किया है। वह सचमुच एक नई सोच है। श्री सिंह कहते हैं कि इस पटवन की व्यवस्था से 85 प्रतिशत पानी सीधे खेतों में पहुंच जाती है। जिससे पानी की बर्बादी तथा खेतों में फसल को आवश्यकता से अधिक पानी मिली है। पटवन की इसी तरह की व्यवस्था श्री सिंह अपने गांव साबीकपुर जाकर तुरंत करने की बात कही। प्रखंड रमीयक ग्राम परसावां के किसान वरुण कुमार कहते हैं कि रामेश्वर जी छह बीघे की खेती से अपना हर सुख सुविधा पा हे हैं। जिसकी वजह है कि इनके खेतों के सभी क्यारियों में फसल को समुचित पानी मिल जा रहा है। वे बतलाते हैं कि हमलोग 60 बीघा खेत रखकर उतना पैसा नहीं कमा पाते हैं। कुमार तो इनकी व्यवस्था देख इतना प्रभावित थे कि वह अपने अन्य लोगों को इस कार्य की जानकारी दूरभाष के द्वारा गांव वालों को दे रहे थे। प्रखंड सूर्यगढ़ा ग्राम कटिहार के संजय कुमार यादव ने बताया कि इनके व्यवस्था को हर किसाना को उतारने की जरूरत है। इस तरह के कार्य से ऊंचे खेतों को भी पानी मिलेगा तथा हर खेत सिंचित होंगे। किसान रामेश्वर के आलू की पैदावार देख सभी भौंचक रह गये। सभी किसानों ने उनसे आलू की खेती की जानकारी विस्तार से लिया।
समाचार स्रोत जागरण